उल्हासनगर :
शहर में लगातार बढ़ती पानी की समस्या ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। नागरिकों को हो रही किल्लत, गंदे पानी की सप्लाई, लीकेज और जर्जर पाइपलाइनों के मुद्दे पर चुने हुए नगरसेवक खुलकर सामने आ गए हैं। प्रशासन पर समाधान के लिए दबाव बढ़ता जा रहा है।महापालिका की पहली महासभा में ही पानी संकट का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया गया था। नगरसेवकों ने अधिकारियों के गैर-जिम्मेदार रवैये पर सवाल खड़े करते हुए महापौर अश्विनी निकम और आयुक्त मनीषा आव्हाळे के समक्ष नाराजगी जताई। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि कई प्रभागों में नियमित पानी नहीं पहुंच रहा, जबकि कुछ इलाकों में दूषित पानी से स्वास्थ्य खतरा बढ़ रहा है।सोमवार को महापौर अश्विनी निकम और उपमहापौर अमर लुंड की पहल पर महापालिका सभागृह में जनप्रतिनिधियों और पानी विभाग के अधिकारियों की संयुक्त बैठक हुई। आयुक्त मनीषा आव्हाळे भी मौजूद रहीं। बैठक में नगरसेवकों ने अपने प्रभागों की समस्याएं विस्तार से बताईं। पुरानी पाइपलाइनों से लीकेज, कम प्रेशर और गंदे पानी की शिकायतें प्रमुख रहीं। कुछ ने मरम्मत में देरी के आरोप भी लगाए। उपमहापौर अमर लुंड ने बताया कि आयुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। जल्द समाधान का आश्वासन दिया गया है। अब शहरवासियों की नजरें जमीनी स्तर पर कार्रवाई पर टिकी हैं। कब मिलेगी पानी संकट से राहत?

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