उल्हासनगर: स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली के खिलाफ आदिवासी आक्रोश मोर्चा — तीन वर्षीय बालक की मृत्यु पर धरना, प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल परिसर में बैठकर विरोध जताया; जिला शल्य चिकित्सक से हुई बैठक, 15 दिनों में जांच-रिपोर्ट का आश्वासन।
उल्हासनगर —
श्रमजीवी संघटना महाराष्ट्र के नेतृत्व में गुरुवार को आदिवासी आक्रोश मोर्चा निकाला गया और बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएँ व पुरुष अंबरनाथ के सरकारी अस्पताल के परिसर में धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय स्वास्थ्य सुविधाओं की कथित बदहाली और तात्कालिक उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और सुधार की मांग की।
आंदोलन का मुख्य कारण 5 जून को प्रकाश नगर (अंबरनाथ) के एक तीन वर्षीय बालक की सर्पदंश के बाद उपचार के दौरान मृत्यु बताई जा रही है। प्रदर्शनकारी परिवार ने दावा किया कि समय पर उचित और आवश्यक उपचार न मिलने के कारण बच्चा बचाया नहीं जा सका। संगठन ने घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
धरने के बाद संगठन का प्रतिनिधिमंडल जिला शल्य चिकित्सक डॉक्टर मनोहर बनसोडे से मिला और अपनी प्रमुख मांगें उनके समक्ष रखीं। प्रशासन ने लिखित आश्वासन देते हुए कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की बैठक आयोजित की गई है तथा बालक की मृत्यु के प्रकरण की जांच के लिए समिति गठित की जा रही है।
डॉक्टर मनोहर बनसोडे ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि 15 दिनों के भीतर जांच पूरी कर उचित निर्णय व कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
प्रदर्शन के दौरान स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस ने शांति बनाए रखी। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों में संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े आंदोलन और सड़क-मार्गों पर प्रदर्शन करने का निर्णय ले सकते हैं।






