उल्हासनगर: लाखों निवासियों को मालिकाना हक — 2011 से पहले की अतिक्रमणें नियमित होंगी, बड़ी राहत: उल्हासनगर की 50+ झोपड़पट्टियों व 2 लाख से अधिक नागरिकों को मालकी का रास्ता साफ।
उल्हासनगर:
नागरिकों के लिए बड़ी राहत भरी खबर और अतिक्रमणों के नियमितीकरण संबंधी ऐतिहासिक निर्णय संवैधानिक बैठकों के बाद घोषित किए गए। मुख्यमंत्री कार्यालय व महसूल मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे तथा आमदार कुमार आयलानी की मौजूदगी में हुई विशेष बैठक में तय हुआ कि 1 जनवरी 2011 से पूर्व की सभी अतिक्रमणें नियमित की जाएँगी। इस निर्णय से उल्हासनगर की 50 से अधिक झोपड़पट्टियाँ और लगभग 2 लाख से अधिक निवासी मालिकाना हक प्राप्त करने के योग्य बनेंगे।
सरकार ने रेडीरेक्नर (Ready Reckoner) के आधार पर केवल 5% की निश्चित राशि भरकर अतिक्रमण नियमित करने का मार्ग रखा है। साथ ही 'डी प्रमाणपत्र' (D-certificate) की कड़ाई में ढील दे दी गई है, जिससे कई पुरानी इमारतों और संरचनाओं को नियमीत कराने में आसानी होगी। विशेष पथक बनाकर इलाके में अभियान चलाया जाएगा ताकि स्थानीय स्तर पर लोगों के कागजात की जांच, नाप-जोख और भुगतान प्रक्रिया तेज़ी से पूरी की जा सके।
निर्णय के अनुसार, नियमितीकरण की प्रक्रिया पूर्ण होने पर लाभार्थियों को मालिकाना हक की 'सनद' जारी की जाएगी और प्रॉपर्टी कार्ड बनवाने का मार्ग खुल जाएगा। साथ ही जिन इमारतों के लिए व्यवहार्य होगा, उन्हें D-फॉर्म अथवा नई निर्माण अनुमति के लिए आवेदन करने का विकल्प भी दिया जाएगा। आमदार कुमार आयलानी ने कहा कि लंबे समय से चली आ रही समस्या का यह स्थायी हल है और शहर के कई परिवारों को इससे सुरक्षा व मान्यता मिलेगी।
स्थानीय प्रशासन ने जल्द ही अभियान की तिथियाँ और आवश्यक दस्तावेजों की सूची जारी करने का आश्वासन दिया है। लाभार्थियों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने पहचान-पत्र, झोपड़पट्टी/प्लॉट से संबंधित पुराने कागजात और कोई भी अन्य समर्थन दस्तावेज तैयार रखें ताकि प्रक्रिया में देरी न हो।






