उल्हासनगर कैंप 2: भाजी विक्रेताओं पर कार्रवाई से विवाद, रोज़गार बनाम नियमों की जंग तेज।

 


उल्हासनगर: 

उल्हासनगर कैंप 2 के गोल मैदान के पास नाना-नानी पार्क क्षेत्र में सड़क किनारे भाजी बेचने वाले विक्रेताओं पर महानगरपालिका की कार्रवाई ने विवाद खड़ा कर दिया है। विक्रेताओं का आरोप है कि स्थानीय नगरसेवक महेश सुखरामनी की शिकायत पर उनकी आजीविका छीनी जा रही है, क्योंकि उनकी कार रास्ते से नहीं गुजर पा रही थी।

विक्रेताओं ने बताया कि वे शाम के समय इसी स्थान पर लंबे अरसे से व्यापार कर रहे हैं और परिवार का पालन-पोषण इसी से होता है। नगरसेवक की शिकायत के बाद अचानक प्रशासन हरकत में आ गया। एक विक्रेता ने कहा, “हमारी रोज़ी-रोटी पर प्रहार हो रहा है।”

नगरसेवक महेश सुखरामनी ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि शिकायत उनकी व्यक्तिगत नहीं, बल्कि स्थानीय निवासियों की है। उन्होंने कहा, “यह रास्ता आम नागरिकों और वाहनों के सुगम आवागमन के लिए है। अतिक्रमण से हजारों परिवार प्रभावित हो रहे हैं। गाड़ियाँ पार्क नहीं हो पा रही हैं और आपात स्थिति में एम्बुलेंस व फायर ब्रिगेड भी नहीं पहुँच सकती।”

सुखरामनी ने जोर देकर बताया कि यह क्षेत्र ‘नॉन-हॉकर्स ज़ोन’ घोषित है और उच्च न्यायालय के आदेशानुसार फेरीवालों से मुक्त रखना अनिवार्य है।

इस घटना ने शहर में रोज़गार और नियमों के बीच संतुलन पर बहस छेड़ दी है। विक्रेताओं की चिंता जीवनयापन की है, तो निवासी व जनप्रतिनिधि सड़क सुरक्षा व सुविधा को प्राथमिकता दे रहे हैं। महापालिका ने विकल्पों पर विचार करने का आश्वासन दिया है।







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