उल्हासनगर में बाबासाहेब की प्रतिमा विवाद का शांतिपूर्ण समापन श्मशान भूमि से सम्मानपूर्वक स्थानांतरित, राज असरोंडकर का छह दिवसीय अनशन समाप्त।

 


उल्हासनगर: 

शांतिनगर श्मशान भूमि में स्थापित भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा को लेकर चला विवाद आखिरकार समाप्त हो गया। प्रशासन ने संवेदनशीलता बरतते हुए प्रतिमा को सम्मानपूर्वक सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर दिया। इससे शहर में पिछले कई दिनों से बना तनाव भी दूर हो गया।

‘कायद्याने वागा’ लोक आंदोलन के अध्यक्ष राज असरोंडकर ने श्मशान भूमि जैसे स्थान पर महापुरुष की प्रतिमा स्थापित करने पर आपत्ति जताते हुए अपने निवास पर आमरण अनशन शुरू किया था। यह अनशन छह दिनों तक चला, जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों और भीम अनुयायियों का भारी समर्थन मिला। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने उल्हासनगर रेलवे स्टेशन परिसर में काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन भी किया।

मामले की गंभीरता को भांपते हुए जिला प्रशासन के निर्देश पर महापौर, मनपा आयुक्त और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की विशेष बैठक बुलाई गई। बैठक में सर्वसम्मति से प्रतिमा को अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने का फैसला लिया गया। सोमवार को प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रतिमा को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया।

इसके बाद महापौर, तहसीलदार, विधायक सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने असरोंडकर के निवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की। उन्होंने नींबू पानी पीकर अपना अनशन समाप्त किया। आंदोलन में रिपब्लिकन नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। आंदोलनकारियों का कहना था कि यह डॉ. आंबेडकर के सम्मान की रक्षा के लिए जनता की सामूहिक आवाज है।

प्रशासन की सकारात्मक पहल और शांतिपूर्ण समाधान से शहर में स्थिति सामान्य हो गई। नागरिकों ने इस लोकतांत्रिक तरीके से विवाद सुलझाने का स्वागत किया है।







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