उल्हासनगर का सिंधु भवन फंसा विवाद के घेरे में।

 


    


उल्हासनगर - उल्हासनगर महानगर पालिका द्वारा सिंधु भवन का निर्माण किया गया है लेकिन इस भवन निर्माण पर ठेकेदार और पालिका के संबंधित विभाग के अधिकारियों की साठगांठ से लाखों का घोटाला किए जाने का मामला प्रकाश में आया है परिणाम स्वरूप यह सिंधु भवन विवाद के घेरे में फंस गया है। 

ज्ञात हो कि उल्हासनगर शहर में सिंधी समाज के लोगों की संख्या अन्य समाज के संख्या के मुकाबले काफी ज्यादा है। शहर में एक सिंधी समाज भवन बनाने के लिए कई सालों से मांग की जा रही थी। जिसके चलते पालिका प्रशासन और तत्कालीन राजनीतिक तथा सामाजिक नेताओं और कार्यकर्ताओं की लगन और मेहनत आखिर रंग लाई जिससे उल्हासनगर शहर में सिंधु भवन निर्माण कार्य शुरू किया गया। देखते ही देखते यह सिंधु भवन निर्माण कार्य पूरा हो गया। सिंधु भवन निर्माण कार्य में बड़ा घोटाला होने की चर्चा शहर में जोर पकड़ रही है। लेकिन इस बारे में किसी भी राजनीतिक सामाजिक पदाधिकारी और कार्यकर्ता द्वारा आवाज नही उठाई जिससे यह शहर में चर्चा का विषय बन गया है।

शहर में चल रही चर्चा के अनुसार यह सिंधु भवन निर्माण कार्य पर पालिका द्वारा लाखों रुपए का ठेका दिया गया है लेकिन ठेकेदार और पालिका के संबंधित विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से सिंधु भवन निर्माण कार्य में बड़ा घोटाला होने की चर्चा जोरों पर चल रही है। अब देखना होगा कि इस सिंधु भवन निर्माण कार्य में हुए घोटाले पर कोई आवाज उठाता है या फिर आवाज उठाने वाले का मुंह बंद किया जाता है यह तो आनेवाला समय ही बताएगा बस हमें उस समय का इंतजार करना होगा।

हम पाठक को बताना चाहेंगे कि उल्हासनगर महानगर पालिका में ऐसा कोई काम नही जिस काम को बगैर घोटाले से किया गया हो। यहा पर शासन, प्रशासन और ठेकेदार की मिलीभगत सदियों से चलती आ रही है जिसे तोड़ना मुश्किल ही नही नामुमकिन है। ऐसा शहरवासियों का मानना है और अनुभव भी है।




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