कहीं यह सच तो नहीं ?

 


(कर्ण हिंदुस्तानी )

भारती और उसके पति हर्ष की गिरफ्तारी के बाद एक बात सामने आने लगी है कि कहीं हिंदी फ़िल्मी दुनिया में कोई ऐसा गिरोह तो काम नहीं कर रहा है जो उन्हीं लोगों को काम देता है जो नशा गैंग में शामिल होने को तैयार हो जाते हैं। यदि ऐसा नहीं है तो उच्च शिक्षा प्राप्त सुशांत सिंह राजपूत कथित तौर पर नशा गैंग का शिकार कैसे बन गया ? भारती सिंह जिसने अपनी छोटी सी ज़िंदगी में गरीबी के सिवा कुछ नहीं देखा और मेहनत के बल पर आगे बढ़ती रही। बाद में भारती सिंह को हर जगह काम मिलने लगा। .... भारती के साथ उसके पति को भी काम मिलने लगा। अब तक हिंदी फिल्म जगत में जितनी भी आत्महत्याएं हुई हैं सबका कनेक्शन कहीं ना कहीं नशे के कारोबार से जुड़ा हुआ प्रतीत होने लगा है। दिव्या भारती से लेकर जिया खान और अब सुशांत सिंह राजपूत की कथित आत्महत्या सोचने को मजबूर कर देती है कि आखिर इन आत्महत्याओं की वजह क्या रही होगी ? पॉप गायक हनी सिंह को भी ना जाने किसने ड्रग्स की दुनिया में धकेल दिया था ? जिससे वह बड़ी मुश्किल से बाहर निकले हैं।  हिंदी फिल्म जगत को आखिर इस नशे की गर्त में कौन धकेल रहा है ? दीपिका पादुकोण , सारा अली खान सहित ना जाने कितने लोग हैं जिनकी प्रतिभा कुछ भी नहीं है मगर उन्हें काम मिल रहा है , किसी में भी एक मंझा हुआ कलाकार नज़र नहीं आता है मगर वह लोग लगातार फिल्में कर रहे हैं। ऐसे लोगों को निर्माता किस आधार पर अपनी फिल्मों में ले रहे हैं ? आशुतोष राणा , राजपाल यादव , गोविंदा और इन जैसे  कई उम्दा कलाकार हाशिये पर क्यों चले गए हैं ? या फिर क्यों फेंक दिए गए हैं ? कहीं फिल्मों में ड्रग माफियाओं का पैसा तो नहीं लग रहा।  क्योंकि भारती सिंह और हर्ष की गिरफ्तारी के बाद यह शक पैदा होना लाज़िमी है कि कल तक जिस हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को हम कोम्प्रोमाईज़ वाली इंडस्ट्री मानते रहे हैं कहीं वह इंडस्ट्री अब ड्रग माफियाओं के हाथ का खिलौना तो नहीं बन गयी है ? आखिर हिंदी फिल्म जगत में ड्रग का कौन सा ग्रुप काम कर रहा है ? इन सभी के मैनेजर इनका हिसाब देखने के साथ - साथ क्या ड्रग्स की दुनिया के भी मैनेजर तो नहीं बन गए हैं ? क्योंकि एक साथ इतने लोगों को ड्रग्स की दुनिया में देख कर यकीन नहीं होता।  अब फ़िल्मी दुनिया में शराब की नदियाँ बहती थीं और अच्छे अच्छे कलाकार भी नशे में झूम कर पार्टी का माहौल खराब कर देते थे मगर अब यह ड्रग्स का मामला सामने आने पर चिंता करना लाज़मी है क्योंकि दादा साहेब फाल्के जी ने हिंदी फिल्म जगत को मनोरंजन के लिए जन्म दिया था नशे के लिए नहीं।  इसलिए मेरी तो यह मांग है कि मुंबई पुलिस को अंदरूनी तौर पर फिल्मों में लगने वाले पैसे और इन पैसों को लगाने वाले लोगों का पता लगाना चाहिए क्योंकि मनोरंजन का यह व्यवसाय बदनाम ना हो।

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