भारत सरकार आयुष मंत्रालय द्वारा कोरोना से लड़ने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली होम्योपैथीक दवाई आर्सेनिक एल्बम ३० लेने की सलाह और सिफारिश।







उल्हासनगर (आनंद कुमार शर्मा)

वैश्विक महामारी नॉवल कोरोना वायरस से लड़ने के लिए पूरे विश्व में अनेक वैज्ञानिक और शोधकर्ताओं ने अलग अलग प्रयोग किये है और कर भी रहे है, लेकिन अभी तक कोई सफलता नही मिली है जिससे यह प्रामाणिक रूप से कहा जाए कि यह दवाई लेने से कोरोना संक्रमण से १००% बचा जा सकता है या ठिक किया जा सकता है।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा जारी दिशानुसार के अंतर्गत कुछ आयुर्वेदिक और होम्योपैथीक दवाई के बारे में बताया गया है जिसके सेवन से समान्य बीमारी से निजात मिल सकती है और विभिन्न रोगों से लड़ने के लिये रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा मिलता है। इसी आयुष मंत्रालय की सिफारिश और सलाह पर शहर में काफी मात्रा में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली होम्योपैथीक दवाई आर्सेनिक एल्बम ३० का वितरण किया जा रहा है और लोगों को इसकी सम्पूर्ण जानकारी दी जा रही है ताकि लोग आने वाले समय मे बढ़ते संक्रमण के खतरे से अपने आपको और अपने परिवार का इम्यून सिस्टम ठीक कर सुरक्षा प्रदान कर सके।

मंगलवार दिनांक १९ मई २०२० को, गुलशन हरीसिंघानी जी के प्रयासों से ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा, बैंक ऑफ बड़ौदा, उल्हासनगर-२ ब्रांच के सभी कर्मचारियों को होम्योपैथीक दवा आर्सेनिक अल्बम ३० का वितरण किया गया और वहाँ मौजूद सभी लोगों के प्रश्नों का उत्तर दवाई कब और कैसे लेना है क्या सावधानी बरतनी चाइए इन सबकी जानकारी दी डॉ. सरिता भाटिया ने।

होम्योपैथीक दवाई आर्सेनिक एल्बम ३० लेने के कुछ नियम और सावधानियां इस प्रकार है -
१. सुबह खाली पेट एक साल से कम उम्र के बच्चों को एक गोली, ग्यारह साल तक के बच्चों के लिए दो गोलियां और बाकी सब के लिए चार गोलियां ।
२. यह गोली को हाथ मे नही लेना इसे सीधे ढक्कन में लेके सीधा मुँह में लेना है।
३. यह सिर्फ तीन दिनों का कोर्स है और बाद में एक महीने बाद एक बार लेना है।
४. यह दवाई लेने के १५-२० मिनट पहले और दवाई लेने के १५-२० मिनिट तक कुछ भी खाना या पीना नही है।
५. अगर दूसरी कोई दवाई चालू है, जैसे बी.पी. या मधुमेह या थाइरोइड, तो दोनों दवाइयों के बीच ३० मिनिट का अंतराल होना चाइए।
६. अगर आर्सेनिक एल्बम ३० ले रहे है तो कैम्पहोरा नही लेनी है।
७. लसुन, कांदा, स्ट्रांग कॉफी, नीलगिरी तेल या जो कड़क या तेज गंध वाली वस्तुओं को इस्तेमाल नही करना चाइए।

ज्यादा जानकारी के लिए देखिए क्या कहना है, कोविड वारियर और कंसल्टिंग होम्योपैथीक डॉ. सरिता भाटिया का और अधिक जानकारी के लिए सपंर्क करें इनके मोबाइल नो. पर जो इस वीडियो में दिया गया है।





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