जुलाई महीने में हुए लॉकडाउन का असर - अंबरनाथ, उल्हासनगर और कल्याण में सफल, कम हो रही है एक्टिव मरीजों की संख्या।


आनंद कुमार शर्मा

कोरोना काल के समय मे एक तरफ आम जनता रोजगार के साधन तलाश रही है तथा महामारी से बचने के लिए कई उपाय कर रही है, वहीं दूसरी तरफ शहर में विभिन्न राजनीतिक पार्टियाँ किसी न किसी मुद्दे पर एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करते दिखाई दे रहे है। अगर कुछ काम अच्छे हुए तो उसकी वाह-वाही लेने में सब आगे आते है और गलत होते ही एक दूसरे पर बयानबाजियों का सिलसिला सुरु कर देते है।

जुलाई की सुरुवात से शहर में बढ़ते कोरोना के प्रकोप को नियंत्रण में लाने के लिए फिर से लॉकडाउन लगाया गया था जिसे २०-२२ जुलाई को समाप्त कर मिशन बिगिन अगेन के तहत P1/P2 नियमों के अनुसार और प्रतिबंदित व्यापार को छोड़ कर बाकी दुकानों को लॉकडाउन के दिशानिर्देशों के अनुरूप खोलने और व्यापार करने की छूट दी गयी है।

जुलाई महीने में किये गए लॉकडाउन का असर देखने को मिल रहा है, इस लॉकडाउन के करण बढ़ते कोरोना संक्रमण पर बोहोत हद तक क़ाबू पाया गया इसलिए इसे सफल लॉकडाउन कह सकते है। अगर लॉकडाउन नही होता तो मुमकिन है कि आज की तारीख में रोजाना कल्याण में १००० और उल्हासनगर में ५०० के पार मिलते कोरोना के नए संक्रमित मरीज। पूरे महाराष्ट्र राज्य में कल्याण डोम्बिवली और उल्हासनगर शहर कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित महानगरपालिका क्षेत्र की गिनती में आते है, इन क्षेत्रों में न केवल संक्रमण पर काफी हद तक काबू पाया गया अपितु एक्टिव मरीजो की संख्या मे भी कमी देखी जा रही है।

नियंत्रण में आये कोरोना संक्रमण फिर से लोगों की लापरवाही और प्रशासन की ढिलाई से बेकाबू ना हो इसके लिये प्रशासन को कड़े कदम और व्यापारियों को सावधानी बरतनी जरूरी है।

न्यू आजादी टाईम्स की तरफ से हम एक बार फिर शहर की जनता, व्यापारियों और राजनीतिक पार्टियों के लोगों से शहर को कोरोना मुक्त करने के अभियान के उद्देश्य को सामने रखते हुए दिए गए नियमों का पालन करने और जो गलतियां मई और जून महीने में की गई थी उन्हें फिर से ना दोहराने की अपील करते है।


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